वागाह अटारी बार्डर पर दिखाया भारतीय सेना ने दम

वागाह-अटारी बार्डर | पंजाब | भारत दर्शन

वागाह-अटारी बार्डर

ढाई बजे तक जीप निकल ली वागाह-अटारी बार्डर। पहले शहर के बाहर फिर हाईवे का रास्ता पकड़ते हुए खेत खलिहानों से गुजर कर बार्डर की ओर।

अमृतसर सीमा खत्म होने के बाद गावों में कड़ी सुरक्षा देखने को मिली। चप्पे चप्पे पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। परिंदा भी पर नहीं मार सकता। जिनके पास खुद का वाहन है वो अपनी चार पहिया गाड़ी से निकल पड़े हैं।

दुपहिया से जाता मुझे कौनों नजर ना आया। मौसम सुहाना बिल्कुल नहीं है, चुभन वाली गर्मी में घण्टेभर के लंबे सफ़र के बाद चार बजे तक वागाह बार्डर पर पहुंच गया। आगे बढ़ा तो मालूम पड़ा बैग बटुआ ले जाना प्रतिबंधित है।

यहाँ मुझे ऑटो वाले और लॉकर वालों कि मिली भगत लगी। लॉकर रूम! सड़कों पर ऐसी कई दुकानें नजर आ रही हैं। मुझे जबरन बैग जमा करवाना पड़ा। बूढ़ी काकी का भी यही हाल है।

जीप में सवारी भरने से पहले ही ड्राइवर ये सूचित कर देता तो छोटा बैग भी होटल में ही भागकर रख आता। ये जबरन वसूली है। बैग के साथ प्रवेश भी ना होगा।

मजबूरन बैग जमा करवा, लॉकर की चाभी अपने पास रख ली, पेमेंट भी हाथो हांथ कर दिया बल्कि ले लिया गया।

सुरक्षा जाँच

मजमे के साथ जैसे जैसे आगे बढ़ा कदम कदम पर जवान दिशा निर्देश देते रहे।

धूप में लोगों के हुजूम में हर कोई गुम है। जोश और देशभक्ति से लबरेज़ युवा सुरक्षाकर्मियों का पूरा सहयोग करते नजर आ रहे हैं। महिलाओं और पुरुषों को अलग अलग किया गया।

सुगबुगाहट हुई कि पांच बजे के बाद अन्दर जाने को नहीं मिलेगा। मुझे लगा शायद मेरा पत्ता ना कट जाए अन्दर जाने का। जबरदस्त सुरक्षा के बीच कारवां आगे बढ़। कतार में काका गुम हो गए।

आगे निकलने की इस क़दर होड़ मची है कि लोग अपने साथ वालों से बिछड़े जा रहे है, जैसे साथी घुमक्कड़ मेरे आगे चलते हुए बहुत आगे निकल गया और एक फासला हो गया।

एक साथ पांच जगह जांच हो रही है, इस तरह का आगे एक और जांच सेंटर भी है। डबल सिक्योरिटी! एक के बाद एक जांच बूथ पार करने के बाद स्टेडियम को जाने वाली सड़क तक आ गया।

स्टेडियम पहुंचने की होड़

लोग पागल हो गए हैं। मानो बार्डर पर जंग लड़ने जा रहे हों। भारत माता की जय का जयघोष लगाते हुए सब के साथ चल रहा हूँ।

मैंने बाकियों से अपनी रफ्तार तेज कर ली ताकि स्टेडियम भरने से पहले मुझे बैठने की जगह मिल जाए। करना पड़ेगा वरना शायद घुसने को भी ना मिले। पांच बजे तक स्टेडियम पहुंचा।

स्टेडियम जाने के लिए लालायित भीड़

निचला पूरा हिस्सा भरा हुआ है, सभी को ऊपर भेजा जा रहा है। पहली मंज़िल बंद भरे होने के कारण बंद कर दी गई है, सीधे दूसरे मंज़िल पहुंचा और दाएं तरफ जा लपककर बैठ गया।

स्टेडियम बहुत तेज़ी से भर रहा है। दूसरे माले का ये हिस्सा भी भरने लगा।

नज़ारे के हिसाब से अधिक जनता होने के कारण पाकिस्तान कि तरफ का कुछ भी नहीं दिख रहा, गर्मी सो अलग। ठीक सामने वाला हिस्सा अभी भी खाली है, इससे पहले वो जगह भी चली जाए मैं फ़ौरन तेज़ी से इधर आ पहुंचा।

यहाँ सुकून है, जनता जनार्दन भी कम है तैनात फौजी भी ज्यादा रोक टोक नहीं कर रहे। और नज़ारा तो बेहद कमाल का शानदार।

अभी स्टेडियम में भीड़ का आना जारी है इसलिए भी कोई कार्यक्रम नहीं शुरू हुआ, देशभक्ति गाने बज रहे हैं ताकि जनता का भरपूर मनोरंजन होता रहे। गानों से स्टेडियम में तगड़ा माहौल बना है।

स्टेडियम के भरते है सारे गेट बंद। रिट्रीट शुरू होने से पहले हांथ में माइक लिए एक जवान जनता में जोश का उत्सर्जन कर रहा है। समारोह शुरू होने से पहले अनेकों देशभक्ति गीत बजाए गए।

जिसे सुन सोई हुई जनता भी जाग कर तालियों की गड़गड़ाहट में अपना योगदान दे रही है।

कुछ लालायित बच्चे और महिलाएं बीच सड़क पर नाचने के लिए उतर आए। इधर अटारी में जश्न का माहौल है उधर सीमा पार वाघा पर इतना सन्नाटा छाया है जैसे मानो कोई चल बसा हो।

वहां जनता जनार्धन से ज्यादा सुरक्षाकर्मी दिखाई पड़ रहे हैं। बार्डर पर भारी तादाद में विदेशी सैलानी भी इस रिट्रीट का आनंद ले रहे हैं।

बीटिंग रिट्रीट

राष्ट्रगान के साथ बड़ी गर्म जोशी के साथ रिट्रीट शुरू हुई। महिला रेजिमेंट ने आगे बढ़ मोर्चा संभाला। इधर ढोल नगाड़े, गाना बजाना, शंखनाद, सीमा पार मैय्यत। पूरे प्रक्रिया को ऑफिशली फिल्माया भी जा रहा है।

इधर हमारा वीर जवान दहाड़ मारता जवाब में उधर से पाकिस्तानी सैनिक हुंकार भरता। एलओसी पर दोनों तरफ के गेट खोले गए। अपने अपने देश को सलामी देते हुए सैनिक पूरी प्रक्रिया के साथ झंडा उतार लिए।

कुछ इस अंदाज में बीटिंग रीट्रीट का समापन हुआ। जो मज़ा रिट्रीट देखने में आया वो किसी में नहीं। माना मैं थका हारा आया था लेकिन अब सारी थकान दूर हो गई।

रीट्रीट की शुरुआत और लीड बीएसएफ महिला रेजिमेंट ने की। दोनों देशों ने अपने अपने झंडे उतार कर बीटिंग रिट्रीट का अंत किया। धीरे धीरे स्टेडियम खाली होने लगा।

जो जवान रिट्रीट करके आए हैं उनके साथ जनता बारी बारी से फोटु खींचा रही है।

भारतीय सेना के आगे ठन्डे पड़े पाकिस्तानी जवान वगह अटारी बॉर्डर

शाम के सात बज चुके हैं, जब सब स्टेडियम खाली कर नीचे चले गए मैं अपने कैमरे से पाकिस्तान की धरती निहारने लगा। देखने लगा ऐसा क्या अलग है जो धरती का वो टुकड़ा पाकिस्तान कहलाता है।

यकीन मानिए ऐसा कुछ भी अलग नज़र नहीं आया वहां भी वही मौसम, हवा, पानी, सूरज और इधर भी। कुछ लोगों की सनक ने अखण्ड भारत का बटवारा कर डाला।

एक दूसरे मार्ग से आयात निर्यात का काम होता है जहाँ आम नागरिकों को जाने की अनुमति नहीं। लेकिन पूरे पाकिस्तान में ऐसा सन्नाटा पारा है जैसे बंद का ऐलान हुए हो।

स्टेडियम से नीचे उतर कर रोड पर आ गया। काफी ज़ोर कि प्यास लगी है। बैग से बोतल निकाली लेकिन वो खाली निकली।

सड़क किनारे लगे नल्के से पानी भरने लगा तभी देखा एक फौजी दो चार लड़कों को हड़काते हुए भगा रहा है जो अल्लहबाजी में सीमा पर मौज मस्ती कर रहे हैं।

इनकी एक भूल चूक और ज़िन्दगी तबाह। टेहेलते हुए बाहर लॉकर रूम के पास आ गया। मुझे उम्मीद नहीं थी कि लॉकर रूम रहेगा मेरे वापस आ जाने तक।

अपना बैग ले मैं उस टेंपो में बैठ गया जो जालियावला बाग जा रही हो ना की रेलवे स्टेशन। आने जाने का किराया एक बार में ही जमा करवा दिया था।

बूढ़ी काकी और काका तीन घंटे बाद अब दिखे और वो स्टेशन रवाना हो गए।

रास्ते भर मटरर्गश्ती करते हुए अमृतसर तक आने में काफी अंधेरा हो चुका है। चौराहे पर टेंपो वाला उतार कर निकल गया। मैं चौराहे से होटल की और जाने लगा रास्ते में चमचमाता हुए गोल्डन टेंपल दिखा।

जहाँ दोबारा जाने से मैं खुद को रोक ना सका। दिन में देखना एक अलग बात है लेकिन रात में इसमें चार चांद लग जाते हैं। जूते उतारे और अन्दर परिसर में आ गया।

जाने कौन सा गेट है कुछ समझ नहीं आ रहा। एक गेट से घुसा और अर्जन दास के सामने वाले गेट से निकला। अब होटल कुछ ही दूर बचा है। होटल पहुंचा यहाँ कुछ देर सुस्ताया।

गोल्डन टेम्पल अमृतसर

होटल मालिक से बातो में पता चला वो भी उत्तर प्रदेश के रहने वाले है। लेकिन उनके लहजे से ऐसा एक बार भी नहीं लगा।

ट्रेन के समय को मद्देनजर रखते हुए कुछ देर बतियाने के बाद इस होटल से भी अलविदा लिया और निकल पड़ा हिमाचल के धर्मशाला के लिए

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One Comment

  1. Dkho jb tm gye the to hme bhut khusi hui thi…hm sbko ye bolte the ki ….ye mera frd h yi life jee ra h…baki sb to bs life kaat re h

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