हिमाचल प्रदेश

हिमाचल का कश्मीर चितकुल

भोर भयो कल रात में एक अनिश्चित आश्रय मिलने के बाद चीजें काफी सरल हो गईं थीं। भारी भीषण बारिश में रुकने के प्रबंध ना होने के कारण शायद हालत कितने बत्तर हो जाते इस बात की कल्पना भी नहीं की जा सकती। गरम पानी की जब जरूरत महसूस हुई तो आंटी जी ने गरमा …

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विश्वप्रसिद्ध नाको झील

भगदड़ वाली सुबह रात तो मानो चुटकी बजाते बीत गई। पर सोते समय दिमाग में ये बैठा लिया था अगर समय से नहीं उठा तो बस छूटने का खतरा ज्यादा होगा। समय रहते आंख खुल गई है पर उठने का मन नहीं हो रहा है। पर घुमक्कड़ी का ये उसूल है। या तो आराम कर …

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1024 साल पुराना ताबो मठ

हिक्किम टिकट वापसी हिक्किम तो जाने से वंचित रह गया और निरशाभाव के साथ काजा को वापसी करनी पड़ी। अभी फिलहाल टिकट वाला प्रकरण चल ही रहा है। मुद्दा और भी तूल पकड़ता जा रहा है। क्यूंकि कंडक्टर ने पैसा तो ले लिया था पर टिकट नहीं थमाया था। हिलती डुलती बस काजा बस स्टॉप …

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कैसे चूका विश्व के सबसे ऊँचे पोस्ट ऑफिस में जाने से

समय से पहले उठना थकान बहुत है शरीर में। पर उठना भी है और निकालना भी है। शुरू में तो अलास हुआ उठने में पर जब ये खयाल आया कि अगर ये बस निकल गई या छूट गई तो पूरा दिन यहीं बिताना पड़ेगा और यथास्थिति कल भी वही दोहरेगा। फिर क्या था जैसे नींद …

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खतरनाक घाटियों में रेकोंग पियो से काज़ा तक का सफर

सुरक्षित बस अड्डा जल्दी सोया ही था जल्दी उठने के लिए। पांच बजे की बस पकड़ने के लिए चार बजे उठना सहूलियत भरा रहा। काल राते सोने से पेहले दरवाज़ा लकड़ी के लट्ठे से जाम कर दिया था। इसलिए कोई अन्दर ना आ सकता था, और ना ही आया। बस आ रहा है तो वो …

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कल्पा का सुसाइड पॉइंट जहाँ लोग जाते है मौत को गले लगाने!

बदली योजना सुबह जल्दी उठने कि बजाए आंख बहुत देर से खुली। जैसा रात में हाँथ में बैग फसा कर सोया था सुबह खुद को वैसा ही पाया। बेंच पर नींद भी सही आ गई। उसके ऊपर स्लीपिंग बैग गद्दे का कम कर गया। रात में कमरे का दरवाजा उड़का लिया था ताकि कोई अन्दर …

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बस अड्डे में किया कब्ज़ा

जल्दी उठने से तौबा आंख खुली मगर उठने का मन नहीं हो रहा है। अजय ने भी उठाने की कोशिश की पर मैंने उठने से इंकार कर दिया। कल रात में जो तय हुआ वो पूरा ना हो सका। सुबह जल्दी उठना, सूर्योदय(सनराइज) देखना। आखिरकार छह बजे आंख खुली। देखा तो टेंट में बैग और …

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अनोखी 360° सिरोलसर झील

निकलने की तैयारी रात को भले ही देरी से सोया लेकिन जल्दी उठने में कोई कसर नहीं छोड़ी। बस पकड़ने के लिए मैं समय पर उठ गया। मोबाइल में समय देखा तो अभी चार बज रहे हैं। हिमाचल में एक दफा बस छूटी तो समझो पूरा दिन बर्बाद। ये तीन चार घंटे की नींद ले …

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मनाली के बुद्ध मंदिर में जाना आखिर क्यों घुमाते हैं चक्र?

होटल की सुबह कल के मुकाबले आज आंख जल्दी खुल गई। लेकिन सुध नहीं है करना क्या है? खिड़की पर नजर पड़ी तो देखा। कमरे के बाहर से खिली खिली धूप की किरणे खिड़कियों से आर पार होते हुए अन्दर आ रही हैं। यही किरणे जब चेहरे पर पड़ी तो फिर नींद ना आई दोबारा।  …

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मनाली में मिली जमकर भीड़

उठते ही दिखा अद्भुत दृश्य कड़ाके की शरीर गला देने वाली ठंड में सुबह चार बजे सोया था। इतनी गहरी निद्रा जिसका कोई जवाब नहीं। सारे मोबाइल, कैमरे, सेल सब चार्जिंग पर लगा कर है सोया था। ताकि जब उठुं तो खाली फोन लेके ना निकलना पड़े। धकापेल नींद से भी नाटकीय ढंग से जगा। …

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