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कैलाश के सबसे निकट केदारनाथ

खुसुर फुसुर मेरे तंबू के पास कुछ सुगबुगाहट हो रही है। कोई तो आदमी खड़ा हो कर तंबू के बारे में बात किए जा रहा है। इन्हीं जनाब की आवाज़ सुन कर मेरी निद्रा भंग हुई। साथ ही आसपास में कुछ और लड़कों की भी आवाज़ आ रही है। ये कहाँ से आ रही है इसकी गणित समझ नहीं आ रही। टेंट के बाहर निकला तो जाना की एक सज्जन किसी महिला के साथ टेंट के विषय में ही बात किए जा रहे हैं। और बगल में जिन लड़कों की आवाज़ आ रही है वो एक बड़े से टेंट से आ रही है। अंकल जी अपने परिवार के साथ पीछे बनी मार्केट की बंद पड़ी दुकान में रुके थे। उन्होंने बताया उनको मेरा ये छोटा सा टेंट बहुत पसंद आ रहा है। उनका बस चले तो यही ले जाएं। बातचीत में पता चला कि अंकल नोएडा के एमिटी कॉलेज में प्रोफेसर हैं। और सोनप्रयाग अपने परिवारजनों के साथ आए हुए हैं। अभी तक चढ़ाई करने वाले थे लेकिन अब उनकी हिम्मत जवाब दे गई है …

सफर के दौरान लौटाया खोया मोबाइल

ब्रम्हमूर्त की बस अलार्म बजा तो देखा चार बज रहे हैं। सारे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जो रात में सोने से पहले चार्जिंग पर लगाए थे वो अब फुल चार्ज हो गए हैं। लंबे सफर में उपकरण चार्ज रहने बहुत जरूरी हैं अन्यथा बहुत तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। पांच बजे की बस पकड़ने के लिए तैयार होने लगा। पेट साफ करने के बाद कमरे में बिखरा सारा सामान समेटने लग गया। नहाने धोने का समय तो नहीं है और ना ही वातावरण उस लायक है। सुबह के समय बहुत ठंड हो रही है। तैयार होने से पहले वो मनाली वाली मोटी जैकेट निकाल ली। और ओढ़ ली। साढ़े चार बजे तक सब कुछ निपटा कर नीचे गेट की ओर जाने लगा तो ताला बंद पाया। जीना इतना सकरा है कि बैग सहित पूरा घूम जाऊं तो जीने में ही मौत है जाए। किसी तरह खुद को मोड़कर बीच वाले माले के कमरे से मलिक के बेटे को ताला खोलने को बोला। कमरे के दरवाज़े को मेरा खटकाना हुआ कि वो जाग उठा। …