All posts tagged: धर्मशाला

स्वर्ग में बसा धर्मशाला क्रिकेट स्टेडियम

जम्मू निकलने की तैयारी जम्मू पहुंचने के लिए सुबह जल्दी उठना और उठने के बाद समय से निकल जाना एक चुनौती है। चिड़ियों की चहचहाहट कान में पड़ने से मैं छह बजे तक सो कर उठा। सर्द हवाओं के बीच टेंट के बाहिर निकला। मौसम बहुत ही सुहावना और ठंडा है। रात में अंधेरे के कारण आस पास और दूर की चीज़ों का अंदाज़ा भी नहीं लग पा रहा था वहीं अब दूर दूर तक देखा जा सकता है। अगर समय रहा तो धर्मशाला क्रिकेट स्टेडियम जरूर जाऊंगा। जैसे ध्यान दिया कि एक लारी वाला एक पहाड़ी से दूसरी पहाड़ी पर दूध की सप्लाई कर रहा है। ये सब इतनी दूर घटित हो रहा है जिसे देखने के लिए एकाग्रचित होना पड़ेगा। मैंने ये नज़ारा अजय को भी दिखाने की कोशिश की पहले तो वो पहाड़ी ही ढूंढता रह गया, बड़ी देर बाद उसे लारी नजर आईं। रात में अंधकार में जो छोटी सी जगह मालूम पड़ रही थी वही चारों ओर पहाड़ियों से ऐसे घिरी है जैसे भारतीय सिनेमा में पुलिस डाकू को चारो …

भाग्सु नाग वाटरफॉल धर्मकोट

पर्यटन स्थल का चुनाव सुबह सवेरे उठना तो जल्दी ही था लेकिन आंख खुली बहुत ही देर से जो कल रात में देर से सोने का परिणाम है। यहाँ तक कि मुझे जगाने भी प्रयेश ही आया, वरना ना जाने और कितनी देर ही सोता रहता। मौसम आज सुहाना नहीं होगा ये खिली खिली धूप देख कर आभास हो रहा है। सोच में पड़ गया कहाँ को घूमने निकला जाए। त्रिउंड जाऊं या फिर धर्मशाला स्टेडियम या यहाँ से 30 किमी दूरी पर स्थित करेरी झील या भाग्सु नाग वाटरफॉल है उसे निहारने वहाँ। विकल्प बहुत हैं साथ ही है भ्रम का बवंडर। इसी मुद्दे पर प्रयेश की राय जाननी चाही। उसने बताया बीती रात त्रिउंड में भारी बारिश और भयंकर तूफान आया है जिसके कारण वहां गड़े सैकड़ों तम्बू उखड़ कर उड़ गए। कोई किसी पहाड़ी पर गिरा तो दूजा कहीं और ही। हालांकि जान कि हताहत नहीं हुई सिर्फ माल का ही नुक़सान हुआ। जो त्रिउंड की चोटी पर ठहरे हुए थे उन्हें खाली हांथ वापस लौटना पड़ा। त्रिउंड जाना और ट्रैकिंग करने …

मैकलोडगंज में सजी संगीत की महफ़िल

अमृतसर से जम्मू तवी से कुछ घंटे के सफर में रात के तीन बजे तक पठानकोट पहुंचा। ट्रेन अपने समय से स्टेशन आई है। उठने में थोड़ी चूक हो गई। लोअर बर्थ पर रखे चश्मे पर उठते समय मेरा हांथ पड़ते ही चश्मे का नाश हो गया। अब बाकी बचे दौरे में मैं नज़र वाला चश्मा पहनने से वंचित रेह जाऊंगा। फिलहाल तो मैकलोडगंज पहुंचने पर ध्यान है। ट्रेन के रुकते ही सारा सामान लेकर स्टेशन पर कूद पड़ा। स्टेशन पर पसरा सन्नाटा डरावना तो नहीं है। पठानकोट पर हुआ अतंकी हमला कुछ दिनों पहले तक चर्चा का विषय बना हुआ था। प्लेटफार्म संख्या एक से बाहर निकलते निकलते चार बज गए। इतना वजन टांग कर चलने के बाद आंखो से नींद ओझल हो चुकी है। बस का इंतज़ार अगली चुनौती है धर्मशाला पहुंचने की। इतनी भोर में धर्मशाला के लिए बस कहाँ से मिलेगी ये पूछते पूछते स्टेशन के बाहर कुछ लोगों ने सहायता करने की मंशा से मार्गदर्शन किया। स्टेशन के ठीक सामने खड़े रहने का सुझाव दिया, हालांकि उनके मुताबिक बस अड्डा …