All posts tagged: त्रिपुरा

पानी पर बसा भारत का सबसे बड़ा महल

उज्ज्यांता महल से नीर महल उज्ज्यांता महल में कुछ दो ढाई घंटे का समय बीत गया है। कुछ ही देर में उत्पल जी का फोन आता है और वो हमें बाहर मिलने को बुला रहे हैं। इतनी देर राजभवन में समय बिता कर अनछुए पहलुओं को जानने को मिला। खासतौर पर पूर्वोत्तर क्षेत्र के आदिवासियों के बारे में। यहां के रीति रिवाज और इतिहास। जिसका जिक्र बहुत कम ही देखने को मिलता है। पिछले दरवाजे से बाहर निकल कर हम चल पड़े मुख्य द्वार पर जहां उत्पल जी हमारा इंतजार कर रहे हैं। अब शायद हम अगरतला के उस महल में जायेंगे जो पानी के ऊपर बसा है। गेट पर पहुंच कर बैग वापस लिए और बाहर ही इंतजार कर रहे उत्पल जी के साथ उनके चार पहिया वाहन में लद कर निकल पड़े नीर महल जो अगरतला से पचास किमी की दूरी पर स्थित है। सफर शुरू हुआ पर नाजी महफूज ने बीच रास्ते में उतरने का संकेत दे दिया। जहां से वो बांग्लादेश अपने नाते रिश्तेदारों से मिलने जाएंगे। तकरीब आधे घंटे में …

उज्जयंता महल

कल उनाकोटी से वापसी के बाद देर शाम मुलाकात हुई केरल से आए नाजी महफूज से। जो हमारी ही तरह भारत घूम रहे हैं पर अंदाज थोड़ा निराला है। ये जनाब लिफ्ट ले कर और संस्थानों में काम कर कर के गुजारा करके भारत का चक्कर लगा रहे हैं। उत्पल भाई की आज कुछ और ही योजना है। इसलिए फटाफट तैयार होकर हम तीनों को अगरतला के म्यूजियम में जाने को कहा। फिर शाम तक नीर महल जो भारत का इकलौता पानी के ऊपर महल है। फिलहाल जो तय हुआ उसी के मुताबिक हम तीनो तैयार होने लगे। चूंकि कपड़े लत्ते काफी मैले हो चुके हैं गुवाहाटी से अबतक के सफर में इसलिए बेहतर होगा इन्हे आज ही धो लिया जाए। सारे कपड़े ले कर घुस गया दुसलखाने में और आधे घंटे की धुलाई के बाद बाल्टी भर कपड़े छत पर फैलाने के लिए अजय को थमा दिए। इधर मेरे स्नान के बाद अजय और उधर नाजी महफूज ने अपनी नमाज पढ़ने के बाद निकलने का तय किया। कुछ ही देर में उत्पल जी हमें …

उनाकोटी 99 लाख 99 हजार 999 मूर्तियां

आश्चर्य यात्रा परसों रात से कल शाम तक के लगातार सफर ने बुरी तरह थका दिया था। जिस वजह से कल अगरतला पहुचनें के बाद भी कोई प्रमुख जगह जाना ना हो सका सिवाय विभान सभा भवन के। घुमक्कड़ी समुदाय से उत्पल जी ने काफी मदद की अब तक। आज उन्होंने मेरे और अजय के लिए उनाकोटी जाने का प्रबंध किया है। उनाकोटी पूर्वोत्तर भारत का बहुत ही जाना माना नाम है। हालांकि कुछ दिनों पहले तक मैं भी इसके बारे में नहीं जानता था। जाना तब जब बंगलौर के एक आर्मी कैंप में एक लड़के ने इस जगह का जिक्र किया। आज उसी जिक्र की हुई जगह पर उत्पल जी हमें भेज रहे हैं। जिसकी ना मैंने कोई योजना बनाई थी ना सोचा था। कल ही उस रास्ते से गुजरते हुए आया हूं। कल रात में ही सुबह के आठ बजे तक तैयार हो जाने का इशारा कर दिया था। ध्यान में थी ये बात और इसलिए अपने हिसाब से समय पर ही तैयार हो कर निकला। सुबह सुबह अपने घर से चल कर …