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बस अड्डे में किया कब्ज़ा

जल्दी उठने से तौबा आंख खुली मगर उठने का मन नहीं हो रहा है। अजय ने भी उठाने की कोशिश की पर मैंने उठने से इंकार कर दिया। कल रात में जो तय हुआ वो पूरा ना हो सका। सुबह जल्दी उठना, सूर्योदय(सनराइज) देखना। आखिरकार छह बजे आंख खुली। देखा तो टेंट में बैग और मेरे अलावा कोई भी नहीं है। सूर्योदय तो हो चुका है। शरीर में जकड़न और थकान दोनों है। टेंट के बाहर निकला तो देखा वो उपद्रवी लड़के अभी भी टेंट के अंदर सो रहे हैं। जिनकी कल रात पूरी घाटी में आग लगाने की योजना थी। आज शाम तक हर हालात में रेकोंग पियो पहुंचना है। टीले पर नजर पड़ी तो देखा वहाँ अजय वहाँ ऊपर वीडियो बना रहा है। पांच बजे उठ कर कुछ फोटो और वीडियो बनाने निकल गया था। अभी घाटी में लगभग काफी लोग टेंट के अंदर ही सो रहे हैं। शायद कुछ का रुकने का विचार हो पर मेरा नहीं। अजय के नीचे आते ही सारा सामान समेटने लगा। मूह धोने के लिए भी पानी …

अनोखी 360° सिरोलसर झील

निकलने की तैयारी रात को भले ही देरी से सोया लेकिन जल्दी उठने में कोई कसर नहीं छोड़ी। बस पकड़ने के लिए मैं समय पर उठ गया। मोबाइल में समय देखा तो अभी चार बज रहे हैं। हिमाचल में एक दफा बस छूटी तो समझो पूरा दिन बर्बाद। ये तीन चार घंटे की नींद ले कर खुद को तसल्ली दी। उठ जा ऐश्वर्य, हम बस में सो लेंगे। मन ने बात भी बड़ी जल्दी मान ली। मैट पर से उठ ही रहा हूँ कि तभी अलार्म बज उठा। अलार्म बजने से पहले उठना आज की पीढ़ी के लिए किसी उपलब्धि से कम नहीं। अलार्म बजा तो लगा मानो बम फटा हो। नींद ना खुली हो होश आया हो। बस छूटने और दिन की बर्बादी से बचने के लिए नींद भंग करना बहुत जरूरी है। इस विचार मात्र से पूरे शरीर में बिजली दौड़ गई हो। फटाफट बोरिया बिस्तर समेट कर बैग में डाला। रातभर ऊनी मोजे टोपा सब बाहरी ही पड़ा रहा। मैट, चादर सब लपेट कर बैग में एडजस्ट कर दिया। बैग टांगा और …