All posts tagged: जम्मू

जम्मू से कश्मीर जाने की जिद्द

कटरा से जम्मू आगमन डोलती हुई बस से रात्रि के तीन बजे तक कटरा से जम्मू आ पहुंचा। बस में कब झपकी लग गई पता ही नहीं चला। दुविधा ये है कि मुझे जाना है कश्मीर। लेकिन वहाँ बदहाली के कारण सब अचानक बंद पड़ गया। ज़ाकिर मूसा के मारे जाने के बाद पूरा जम्मू कश्मीर प्रभावित हो गया है। ऐसा ये पहली बार नहीं हुआ है। घरों में टीवी के सामने बैठ कर हम अक्सर ऐसी खबरे सुनते आ रहे हैं। “कश्मीर में बिगड़े हालत लोग घरों में कैद होने को मजबूर।” “आतंकी हमले में कश्मीर में कर्फ्यू। घुसबैठिए चार घंटे में किया ढेर।” शिवखोड़ी से लौटने के बाद मुझे ऐसी किसी खबर की कोई उम्मीद नहीं थी। मैं कल रात स्तब्ध भी था और हैरान भी। आखिर ये क्या हुआ। समझ भी नहीं आ रहा था क्या करना सही रहेगा। आनन फानन में लिया जम्मू आने का फैसला ही मुझे सही लगा। देर रात जब बस पहुंची तब कंडक्टर ने जोरदार आवाज लगाते हुए सोते हुए सभी यात्रियों को उठाया। सोते हुए यात्रियों …

शिवखोड़ी की रेहस्मई गुफाएं

जाने की तैयारी कल रात जितनी देरी से सोया आज सुबह उतना विलंब उठने में भी हुआ। छोटे से कमरे में सारे इलेक्ट्रॉनिक आइटम भी रात भर में चार्ज हो गए। बंद पड़े कूलर के ऊपर से दाईं तरफ के प्लग में अपना खुद का सॉकेट फिट किया था। जिसमे दो ट्रांसफार्मर(पावर बैंक), दो मोबाइल एक GoPro, एक चार सेट वाला सेल चार्जर खुसा है। आज हर हाल में शिवखोड़ी की रेहस्मई गुफाएं देखने जाना है। जितना सॉकेट के ऊपर लोड है उतना तो आम आदमी रोजमर्रा की ज़िन्दगी में चलते फिरते उठा लेता है। आंख खुली बिस्तर पर आसपास हाथ पटका लेकिन मोबाइल ना मिला कहीं। मिलेगा भी कैसे मोबाइल तो दो गज की दूरी पर बंद कूलर के ऊपर रखा है। अंगडाते- जम्हाई लेते हुए बिस्तर से नीचे उतरा। आंख मसलते हुए कूलर पर रखे मोबाइल में समय देखा तो नौ बज रहे हैं। सिर्फ दो घंटे में पहुंचना है बस अड्डे। आज भारत की राजनीति के लिए बड़ा दिन है। हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव के नतीजे शाम तक घोषित होने …

आधी रात में वैष्णो देवी की चढ़ाई

पठानकोट से कटरा तीन घंटे के भीतर पठानकोट से कटरा पहुंच गया। बस में ज्यादा सवारी नहीं है, जो थी भी वो फुटकर में पहले ही उतरती गईं। लेकिन ये एक डेढ़ घंटे का सफर बड़ा मजेदार रहा। इन हरी भरी पहाड़ियों के बीच से गुजरना अच्छा अनुभव है। ऐसी पहाड़िया हो और तन्हा गाने बजते रहें तो मनुष्य एक अलग ही संसार में पहुंच जाता है। बगल में रखे बैग में छोटे बैग को जोड़ा और खुद को तैयार करने लगा आज की रात एक लंबी चढ़ाई के लिए। कंडक्टर बाबू हल्ला मचाते हुए अलार्म घड़ी का काम कर गए। जो बची कुची सवारियां सो गईं थीं वो भड़भड़ा के जाग उठीं। चलती बस में मैं डगमगाते हुए अपना बैग लेकर दरवाज़े तक आ गया। ना तो बस अभी रूकी है ना ही मैं नीचे उतरा हूं। दलालों में मची होड़ चौराहे से बस मुड़ती है और कुछ लड़के मुझे रिसिव करने के लिए दौड़ लगा देते हैं। दरवाजे का सहारा लिए मैं खड़ा सोच में पड़ गया, क्या मैं इन्हे जनता हूं? हद्द …