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दुनिया का सबसे ऊंचा पेट्रोल पंप

मेरा मन प्यासा पिछले रास्ते से तीन बुद्ध मूर्तियां देखने को मिलीं। जो आगे वाले हिस्से से बिल्कुल भी नहीं दिखाई पड़ रहीं थीं। इन्हे देख के लग रहा है एक भव्य भवन बनाने की योजना है यहाँ पर। प्यास भी लग आईं। पानी के लिए जब बोतल पर हाँथ पड़ा तो वो खाली निकली। पास में ही बने मजदूरों के भवन से शायद पानी की व्यवस्था हो जाए। इसी आस में भवन के पास आ खड़ा हुआ। पर यहाँ तो अलग ही सन्नाटा छाया हुआ है ऊपर से घोर अंधेरा। मुड़ कर वापस चलने ही वाला था कि अचानक से एक महाशय प्रकट हुए जिन्होंने उनकी कुटिया में आने का कारण पूछा। प्यास की इच्छा को पूरा करने का मेरा उद्देश्य जानने के बाद उन्होंने अपने पीने वाले स्त्रोत से पानी निकाल कर दिया। पानी जैसे ही मूह में भरा मानो पूरा जबड़ा जाम हो गया हो। इतना ठंडा जिसकी कोई हद्द नहीं है। निवेदन करते हुए थोड़ा काम ठंडा पानी पीने की इच्छा ज़ाहिर की तो मालूम पड़ा इससे गरम पानी यहाँ उपलब्ध …

खतरनाक घाटियों में रेकोंग पियो से काज़ा तक का सफर

सुरक्षित बस अड्डा जल्दी सोया ही था जल्दी उठने के लिए। पांच बजे की बस पकड़ने के लिए चार बजे उठना सहूलियत भरा रहा। काल राते सोने से पेहले दरवाज़ा लकड़ी के लट्ठे से जाम कर दिया था। इसलिए कोई अन्दर ना आ सकता था, और ना ही आया। बस आ रहा है तो वो है शोर शराबा।  रेकोंंग पियो बस अड्डे से अधिकतर बसें सुबह सवेरे निकल लेती हैं तब जा कर कहीं २००-२५० किमी दूरी का सफर शाम तक तय कर पाती हैं। कुछ यही हाल शायद मेरा भी होने वाला है?  दरवाज़ा खोला तो पाया जितना शोर छन कर अन्दर आ रहा है उतनी भीड़ तो ना दिख रही है। मैंने चार्जिंग प्वाइंट से सारे मोबाइल और पावर बैंक समेट कर सब अन्दर लपेट दिया। इतनी देर में अजय निकल गया नहाने। इधर मैने सारा बुरिया बिस्तर समेटा। उड़के हुए दरवाज़े को देख लोग अब अन्दर आने लगे हैं। कुछ ने तो अपना मोबाइल भी जड़ दिया है चार्जिंग पे। दस मिनट में अजय तैयार हो कर आ गया। इधर अजय के …