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मेघालय सड़क दुर्घटना में बाल बाल बचा

एलिफेंटा से डावकी गांव एलिफेंटा झरना मेहेज घंटे भर के अंदर ही भ्रमण हो गया। खास है तो सिर्फ वो झरना जो भारत के किसी और कोने में ना मिले। वापसी में जिस दुकान में बैग रखे हुए थे वहीं से थोड़ा नाश्ता करना बेहतर लगा। नाश्ता भी इसलिए ही किया क्योंकि दुकानदार ने हमारा बैग रखवा कर काफी बोझ हल्का कर दिया था। जिस कारण झरना इत्मीनान से देखना संभव हो पाया। आखिर इंसान ही इंसान के काम आता है। और ये इंसानियत अभी ज़िंदा है। सैलानी होने का फायदा भी यही है की दूसरे शहर में लोग अक्सर मदद के लिए हांथ आगे बढ़ा ही देते हैं। चार कोस दूर खड़ी स्कूटी को चालू करके ले आया दुकान के पास। एक बैग आगे ठूंसा और दूसरा बैग अजय ले कर बैठ गया पिछली सीट पर। फिलहाल कुछ दूरी तक गाड़ी मैं ही चलाऊंगा और उसके कुछ दूरी तक अजय। ये क्रम ऐसे ही चलता रहेगा शाम तक जबतक मंज़िल पर पहुंच ना जाऊं। गेट के पास पहुंचा तो यहाँ पार्किंग की रसीद मांगने …

सफर के दौरान लौटाया खोया मोबाइल

ब्रम्हमूर्त की बस अलार्म बजा तो देखा चार बज रहे हैं। सारे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जो रात में सोने से पहले चार्जिंग पर लगाए थे वो अब फुल चार्ज हो गए हैं। लंबे सफर में उपकरण चार्ज रहने बहुत जरूरी हैं अन्यथा बहुत तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। पांच बजे की बस पकड़ने के लिए तैयार होने लगा। पेट साफ करने के बाद कमरे में बिखरा सारा सामान समेटने लग गया। नहाने धोने का समय तो नहीं है और ना ही वातावरण उस लायक है। सुबह के समय बहुत ठंड हो रही है। तैयार होने से पहले वो मनाली वाली मोटी जैकेट निकाल ली। और ओढ़ ली। साढ़े चार बजे तक सब कुछ निपटा कर नीचे गेट की ओर जाने लगा तो ताला बंद पाया। जीना इतना सकरा है कि बैग सहित पूरा घूम जाऊं तो जीने में ही मौत है जाए। किसी तरह खुद को मोड़कर बीच वाले माले के कमरे से मलिक के बेटे को ताला खोलने को बोला। कमरे के दरवाज़े को मेरा खटकाना हुआ कि वो जाग उठा। …

चंडीगढ़ से मनाली तक का जोखिम भरा सफर

जम्मू से अम्बाला शालीमार एक्सप्रेस से सुबह के पांच बजे मैं अंबाला पहुंचा। यहाँ से ये तय किया कि चंडीगढ़ से दिन की बस में बैठ कर मनाली निकल जाऊंगा। ट्रेन से उतरा तो स्टेशन पर काफी भीड़ देखने को मिली। बैग लेके इधर उधर दुसलखाने की खोज करने लगा। काफी देर और दूर तक चलने के बाद दाहिने हांथ पर मुझे लोगों का जमावड़ा दिखा। जिससे मुझे लगा शायद यही वो जगह है जिसकी तलाश है। पर वो ना है। थोड़ा आगे बढ़ा तो दुसालखाना भी मिल गया। कुछ एक घंटे में तैयार होकर मैं स्टेशन के बाहर आया। सुबह के आठ बज रहे हैं। अब ये पता करना है कि चंडीगढ़ के लिए बस कहाँ से मिलेगी। स्टेशन के बाहर ही पता चला चंडीगढ़ को जाने के लिए बहुतेरी बसें हैं। मैन रोड पर आते ही यहाँ खड़ी एक बस नजर आई। चंडीगढ़ से अंबाला कंडक्टर द्वारा चंडीगढ़ चंडीगढ़ आवाज़ सुन मैं लद गया इसी बस में। बस में अधिकतर सवारियां रोजमर्रा की मालूम पड़ रही हैं। कोई चंडीगढ़ अपने दफ्तर को निकला …

जम्मू से कश्मीर जाने की जिद्द

कटरा से जम्मू आगमन डोलती हुई बस से रात्रि के तीन बजे तक कटरा से जम्मू आ पहुंचा। बस में कब झपकी लग गई पता ही नहीं चला। दुविधा ये है कि मुझे जाना है कश्मीर। लेकिन वहाँ बदहाली के कारण सब अचानक बंद पड़ गया। ज़ाकिर मूसा के मारे जाने के बाद पूरा जम्मू कश्मीर प्रभावित हो गया है। ऐसा ये पहली बार नहीं हुआ है। घरों में टीवी के सामने बैठ कर हम अक्सर ऐसी खबरे सुनते आ रहे हैं। “कश्मीर में बिगड़े हालत लोग घरों में कैद होने को मजबूर।” “आतंकी हमले में कश्मीर में कर्फ्यू। घुसबैठिए चार घंटे में किया ढेर।” शिवखोड़ी से लौटने के बाद मुझे ऐसी किसी खबर की कोई उम्मीद नहीं थी। मैं कल रात स्तब्ध भी था और हैरान भी। आखिर ये क्या हुआ। समझ भी नहीं आ रहा था क्या करना सही रहेगा। आनन फानन में लिया जम्मू आने का फैसला ही मुझे सही लगा। देर रात जब बस पहुंची तब कंडक्टर ने जोरदार आवाज लगाते हुए सोते हुए सभी यात्रियों को उठाया। सोते हुए यात्रियों …