पशु पक्षियों के बीच व्यतीत किया समय

तमिलनाडु | भारत दर्शन | मुसिरि

कल रात थंजावुर से त्रिचिपल्ली आ पहुंचा था। जिसके बाद बस के द्वारा सफर करके मुसिरी गांव में डेरा डाला है सामुदायिक मित्र के घर।

पिछली रात तिरुचिपल्ली से मुसीरी कृष्णापुरम आया था। यहां आधी रात को लेने खुद नवीन अपने वाहन से आए थे। नवीन कृष्णन सामुदायिक मित्र है जिनका तिरुचिपल्लि के मूसिरी गांव में खुद का फार्म हाउस है।

नवीन गार्डन में अनेक प्रजाति के पशु पक्षी मौजूद हैं। वह बड़े व्यापारी हैं। साथ ही सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय हैं। चील कौआ, ऊंट, घोड़ा, गधा और कुछ पानी की महंगी मछलियां।

दंग तो मैं तब रह गया जब रात में कार से उतरा भी नहीं था की सिर्फ दरवाज़ा खोलने पर कुकुर सेना आ गई स्वागतम के लिए। नवीन ने बताया की हम उनकी गाड़ी में आए हैं इसलिए दुलार कर रहे हैं अन्यथा ऐसे कोई इस उद्यान में घुसे तो उसकी खैर नहीं।

यहां अनेक प्रकार के कुकुर हैं, जैसे रोटविलर, चिहुआहुआ, पग, लैब्राडोर, डाबरमैन और ग्रेट डेन जैसे कुत्ते यहां पले हुए हैं। इन सभी में से जो सबसे ख़तरनाक है वह है रॉटविलर।

घायल कौआ खुदबखुद उद्यान में अपनी सेवा कराने आ गया

हाल ही में हरियाणा के पानीपत में एक कुत्ता अपने देखभाल करने वाले को मारकर खा गया था। वह काफी देर तक कुत्ते से जूझता रहा, लेकिन कुत्ते ने उसे बख्शा नहीं।

कुत्ता इतना खूंखार हो चुका था कि वह उसे काफी देर तक नोचता रहा, पर लोगों की हिम्मत नहीं पड़ी उसे भगाने की। ये कुत्ता था, दुनिया की सबसे खतरनाक प्रजाति रोटविलर का।

यह अपने उग्र बर्ताव के लिए काफी बदनाम है। यूरोप, अमेरिका में इसके पालन पर प्रतिबंध लगा रखा है, हालांकि भारत में नहीं है। पिटबुल को दुनिया का सबसे खतरनाक कुत्ता माना गया है दूसरे नंबर रॉटविलर।

गुस्से में शेर पर भी हमला कर सकता है यह कुत्ता। अपियुक्त प्रशिक्षण ना देने से वे काटने और व्यक्ति या अन्य जीव को मार देने की घटनाओं को अंजाम देते हैं।

बाकी कुत्ते भी ख़तरनाक है लेकिन इसके जितने नहीं। कल रात जब मैं अपने कमरे से दुसलखाने तक गया तब घोर अंधेरा था। और दुसालखाने से बाहर निकलने पर इसे सामने खड़ा पाया।

अंधेरे में यह नस्ल पहचान में नही आ रही थी, लेकिन मैं आहिस्ता आहिस्ता अपने कक्ष में आ गया। क्यों की कोई भी साधारण कुत्ता झपट सकता है, तब तो यह खूंखार नस्ल है।

सुबह जब पता चला जो पिछली रात दरवाज़े पर खड़ा था वह रोटविलेर था, मैंने सबसे पहले अपनी सलामती का ऊपरवाले को धन्यवाद किया। क्यों कि अगर मैं कोई भी हरकत करता या भागता तो यह मेरे शरीर के चीथड़े भी कर सकता था।

गोधा

ख़तरनाक डाबरमैन और ग्रेट डेन भी हैं लेकिन इसके जितने खूंखार नहीं। लेकिन मेरा पसंदीदा लैब्राडोर और रॉटविलर ही है।

यहां घोड़ा, बैल, भेड़, बकरी और एग्वाना भी है। नवीन भाई के फार्म हाउस पर गणेश जी जो कि यात्रा समुदाय से हैं वो इनके यहां पिछले एक साल से अपनी बीवी और बेटे के साथ रुके हुए हैं।

जो अब जिम्मेदारी के साथ यहां की व्यवस्था संभालते हैं और अन्य जरूरतमंद चीज़ों की भी देख रेख करते है। उनकी अर्धांगिनी श्रृद्धा पशुओं का भोजन तैयार भी करती हैं और उन्हें खिलाती भी वही हैं।

पशु उनके अलावा किसी और के हाथ से अन्य ग्रहण नहीं करते। कुछ दिन पहले एक घायल कौआ यहां गिर गया था तबसे उसकी देखभाल श्रृद्धा जी ही करती हैं।

दिन के भोजन भी के पश्चात गणेश जी मुझे इसी फार्म हाउस में आगे बन रहे अस्पताल में ले आए। यह अस्पताल उन बच्चों के लिए बनाया हा रहा है जो अपना इलाज स्वयं नहीं करा सकते या अनाथ है।

इलाज के बाद कुछ दिन इन्हें देखरेख में रखा जाएगा फिर इन्हें वापस इनके घर को रवाना कर दिया जाएगा। ऐसा संयोजन रखा जाएगा।

फार्म हाउस के ठीक बगल में टाटा का पच्चीस सौ एकड़ में सोलर प्लांट फैला हुआ है। यह काफी विशाल है इतना की जहां तक आपकी नज़र पहुंच सके।

खेत घर के पीछे बने टीले पर चढ़ कर शानदार नजारा दिख रहा है। वो सामने खड़ी पहाड़ी। यहीं पर बन रहा है एक स्विमिंग पूल जिला निर्माण कुछ दिनों में पूरा हो जाएगा।

घोडा, ऊंट, बैल जैसे अन्य पशु भी

गणेश का सात साल का बेटा बहुत ही प्रतिभाशाली बच्चा है। सात साल के इस बच्चे को भारत में बोले जाने वाली सात प्रकार की भाषाओं का ज्ञान है।

गणेश जी ऐसे ही हर साल कभी पहाड़ों में तो कभी गांव में एक साल के लिए डेरा जामा लेते हैं। यह उनके बच्चे के विकास के लिए बहुत ही अच्छा सिद्ध हो रहा है और आगे भी होगा।

जो यह बच्चा इस आयु में सीख रहा है या सीखेगा वह कई लोग अपनी जवानी तक में नहीं सीख पाते। शेष दिन भी आराम करने में और जीवों को स्नेह करने में निकल गया।

दिन कब गुजर गया पता ही नहीं लगा।

टाटा के सोलर पैनल के सामने का दृश्य

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