गुरुद्वारा गुरु का ताल

आगरा | उत्तर प्रदेश | भारत

सुबह परीक्षा लिखने के बाद मैं वापसी में ऑटो से उतर कर गुरुद्वारे पर आ गया। सोच रहा हूँ की घर पर जा कर भोजन के बाद दोबारा यहाँ आऊं।

लिफ्ट मांगते हुए घर पहुंच गया। बाहर ही मुझे सिराज और डेविड मिल गए। जिन्होंने अपने आगे की योजना बनाई। ये दोनो भी अभी गुरुद्वारे नहीं गए हैं।

घर पर आ कर हांथ मूंह धुला। उधर नैंसी खाने के लिए थाली लगाने लगी। खाने पर मालूम पड़ा की दिन में एक बजे तक दोनो घुमक्कड़ सोते रहे। जो कल की थकान मिटा रहे थे।

नैंसी ने बताया की रात को मियां बीवी न्योते पर आमंत्रित हैं जिस कारण शायद हमारे वापस आने तक कोई ना मिले। इसलिए घर की चाभी मुझे थमा दी ताकि वापसी में बाहर ना बैठना पड़े।

खाने के बाद कैमरा ले कर निकल पड़ा गुरुद्वारा पैदल ही। संध्या में ढलते हुए सूरज की रोशनी में गुरुद्वारे पहुंचा।

डेविड बाहर ही खड़ा हो गया। मैं और सिराज अंदर निकल आए दर्शन करने। सिर पर कपड़ा बांध पैर धुलते हुए सीढ़ी चढ़ मुख्य स्थान पर आ गया।

कमरे में भीतर प्रवेश करने पर आपार शांति का अनुभव महसूस कर पा रहा हूँ। कुछ जने अपने परिवार संग तो कुछ अकेले ही गुरु की शरण में बैठे हैं।

गुरूद्वारे के बाहर की तस्वीर

तख्त पर बैठा नन्हा बालक तख्त पर रखे ग्रंथ को पढ़ रहा है। जो काफी सराहनीय है। दर्शन के बाद बाहर निकल बाईं ओर प्रशाद के तौर पर हलवा ग्रहण कर हम नीचे आ गए।

आज इन दोनो की ही मंत्राणा है या तो प्रयागराज निकलने की या फिर बनारस। इसी लिए बाहर इनके जाने के लिए स्थानीय लोगों से पूछ पड़ा स्टेशन या बस अड्डे तक जाने का पता।

दिन के खाए हुए दोनो शेर अब भूख की वजह से तड़प उठे हैं। गुरुद्वारे के भीतर चल रहे लंगर पर आ कर चावल ग्रहण कर अपनी भूख मिटाने लगे।

पैदल उसी मार्ग से आते हुए घर पर आ पहुंचा। देखा नैंसी अभी भी घर पर ही है। नैंसी के निकास के बाद बातों बातों में रात हो गई।

दोनो ने तय किया की अगले दिन वो भी मेरे साथ फतेहपुर सीकरी चलेंगे। फतेहपुर में सामुदायिक मित्र को सूचित कर दोनो का पहचान भेज कल वहाँ जाने का सुनिश्चित कर लिया।

जाने कब सो गया मालूम ही नहीं पड़ा। रात में नींद से जगा डेविड ने खाने के लिए उठाया पर प्रबल इच्छा ही नहीं हुई खाने की। थक कर दोबारा आंखे मीच कर सो गया।

आगरा में आज का कुल सफर 20किमी

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