चेन्नई या कांचीपुरम?

अराक्कोनम | तमिलनाडु | भारत

बंगलुरु से प्रस्थान

आज का कार्यक्रम अभी तक कुछ तय नहीं हो सका है। इस असमंजस में अनिश्चिता के बीच में दोबारा अर्जुन से मिलने निकल गया।

कुछ देर में मुझे कांचीपुरम से सतीश झिल्ला का निमंत्रण आता है कांचीपुरम आने के लिए। इधर अर्जुन अपने दफ्तर निकल पड़ा और मैं दोपहर का स्वादिष्ट भोजन करने पास के रेस्तरां में आ गया।

कांचीपुरम से यूं अचानक मिले न्योते से असमंजस और बढ़ गई है। जिस तरह से सतीश से बात हुई उसका भी ठोस प्रमाण नहीं मिल रहा की वाकई में वो रूकवाएगा या सिर्फ आमंत्रण दे कर छोड़ दिया जैसा की कई लोग करते हैं।

खैर ये तो तय है की आज बैंगलोर में नहीं रुकना है। रेस्तरां में लालायित था डोसा खाने को। जो की बहुत ही लजीज है पर बहुत कम मात्रा में रहा।

पर पूजा करने के बाद बस पकड़ कर रेलवे स्टेशन के लिए निकल पड़ा। बैंगलोर प्रसिद्ध है अपने यातायात जाम के लिए। यहाँ घंटो लग जाते हैं कुछ मील पहुंचने में। बैग खाली करने के बाद अब बहुत ही हल्का लग रहा है।

रेल परिसर पहुंचने से पहले बस में बैठे बैठे मोबाइल ऑनलाइन टिकट आरक्षित कर लिया अर्रानोकम तक। अगर बीच में योजना चेन्नई जाने की बनेगी तो उतरकर चेन्नई का टिकट ले लिया जाएगा।

बस से उतरकर तीन बजे तक स्टेशन आ गया। बैग जांच कराने के बाद देखता हूँ की पहले नंबर पर अर्रानोकम तक के लिए ट्रेन खड़ी है।

साथी घुमक्कड़ को चेन्नई से बुलावा

ट्रेन में चढ़ अपनी निर्धारित सीट पर बैठ गया। दिमाग अभी भी असमंजस में है की कहाँ जाना है। इधर मैं लगातार अपने चेन्नई के मित्रों के संपर्क में हूँ जिनके यहाँ आज ठहर सकता हूँ।

ट्रेन कुछ ही देर में निकल पड़ी। पर पूरी तरह से नहीं। बैंगलोर में ही भीतरी स्टेशन पर बार बार रुक रही है। उधर सतीश का फिर से संदेश आया कांचीपुरम पहुंच जाने का।

अब जा कर पूर्णतः विश्वास हो गया है की कांचीपुरम में कोई समस्या वाली बात नही होगी। ट्रेन काफी आगे निकल आई है।

उधर साथी घुमक्कड़ को बोल दिया चेन्नई से निकलने को सही समय रहते। कांचीपुरम पहुंचने को कहा।

शुरुआत में साथी को संकोच हुआ कांचीपुरम आने में। उसे कांचीपुरम आने का फैसला जल्दी लग रहा है। वह मुझे वापस बैंगलोर लौट जाने का मशवरा देने लगा।

मैं तीन स्टेशन पार कर चुका हूँ और अभी भी बैंगलोर वापस जा सकता हूँ। इसी कारण बंगलौर के दूसरे सामुदायिक मित्रों के लगातार संपर्क में हूँ।

इधर सतीश भी मेरी भाषा नहीं समझ पा रहा है। जिसके कारण मैं असमंजस में हूँ। पर अंतिम फैसला यही है की जो होगा देखा जाएगा। चला जाएगा कांचीपुरम।

ट्रेन जिस रफ्तार से चल रही है उसी रफ्तार से दिमाग भी। मोबाइलके जरिए साथी घुमक्कड़ पर कांचीपुरम आने का दबाव डाल रहा हूँ।

पता चला साहब अभी कहीं आराम फरमा रहे हैं बाल कटवाने के बाद। बस मैंने चेन्नई से फौरन निकलने का दबाव बनाया।

डालना फायदेमंद सिद्ध हुआ। हालांकि मैंने उसे सतीश के अंग्रेजी भाषा ना समझ पाने के बारे में बताना उचित नहीं समझा।

आश्वाशन के लिए इतना जरूर बताया की कांचीपुरम में रहने का प्रबंध हो गया है। जिससे साथी घुमक्कड़ चेन्नई से समय रहते निकल ले।

अराक्कोनम रेल परिसर

अरक्कोनाम स्टेशन

यह काफी बड़ा खतरा लिया है मैंने। अगर कांचीपुरम पहुंच कर सतीश ना मिला तो क्या होगा? या आखिरी समय पर धोखा हो जाए। क्योंकि सतीश ने उस निश्चय के साथ बुलाया है या नहीं ये तो वहाँ पहुंच कर ही पता चलेगा। सोचने वाली बात हो जाएगी।

साथी घुमक्कड़ ने शाम को चेन्नई से ट्रेन पकड़ ली ओन्नकुलाम आने के लिए। मैं चेन्नई इसलिए भी नहीं जा रहा हूँ क्यों की 2016 में मुझसे वहाँ की तपिश बर्दाश्त नहीं हुई थी।

ऐसा कुछ खास नहीं है घूमने को। इसलिए बैंगलोर में ही बैग हल्का करना लाभकारी रहा। बैंगलोर अपना दूसरा घर जैसा लगता है। यहाँ 2016 में चार महीने झक्क मारी थी।

देर शाम तक अरक्कोनाम स्टेशन पर ट्रेन का आना हुआ। मुख्या परिसर से ना निकलते हुए बाकियों की तरह मैं भी पटरी फांदकर निकलने लगा। दाएं बाएं कोई भी ट्रैन नहीं आ रही है। आराम से निकलता हुआ बहार आ गया।

स्टेशन से पैदल ही से बस स्टैंड पहुंच गया। स्टेशन के बाहर बहुत ऑटो वाले खड़े थे।

पर सोचा डेढ़ किमी का रास्ता तो आराम से चला जा सकता है। इसके लिए क्या ही ऑटो करता। ऑटोवाले बहुत ही आत्मविश्वास के साथ खड़े थे की ये सवारी तो बैठेगी ही पर वो खड़े ही रह गए।

सफर अभी समाप्त नहीं हुआ है। क्योंकि अभी तो कांचीपुरम बस अड्डे जाना है। अरक्कोनाम बस अड्डे पर आ कर खड़ा हो गया। आसपास खड़े लोगों से कांचीपुरम बस के बारे में पूछा तो मालूम पड़ा बस कुछ ही क्षणों में आती होगी।

बस का आना भी हो गया। यहाँ से बस में चढ़कर अंधेरे रास्तों से गुजरती जा रही है बस।

कांचीपुरम

घंटे भर में कांचीपुरम पहुंच गया। बस अड्डा काफी बड़ा है। भीड़ और अंधेरे के बीच मैं एक किनारे आ आकर सतीश का इंतजार कर रहा हूँ।

फोन करके भी सतीश को बता दिया और संदेश भी भेज दिया है। व्यवहार से तो यही लग रहा है की गंभीरता से बुलावा भेज है।

कुछ ही वक्त में देखा स्कूटी पर सवार एक लड़का हाथ हिलाते हुए मुझे अपनी ओर बुला रहा है। ध्यान दिया तो सतीश निकला।

मुलाकात हुई पर ज्यादा बात नहीं। काम शब्दो मे ही समझ गया की बैठना है और चल देना है। ना सतीश को हिंदी आती है ना मुझे तमिल। संवाद करना कठिन होगा पर असंभव नहीं।

बैग लादकर पिछली सीट पर सवार हो चल पड़ा जहां सतीश ले जा रहा है। बस अड्डे से पतली गलियों और सड़कों से गुजरते हुए एक छोटी इमारत के सामने आ खड़ा हुआ। जो सतीश का घर है।

घर के भीतर अपनी स्कूटी रखी और मुझे पहले माले पर ले आया। घर आते ही मैंने साथी घुमक्कड़ का जायजा लिया। पता चला वो भी कांचीपुरम के निकटम स्टेशन पर आ पहुंचा है।

घर पर से ही मैंने व्हाट्सएप संदेश के माध्यम से अपना स्थान साथी घुमक्कड़ से सांझा कर दिया। सतीश का भी साथी के बारे में पूछना हुआ।

थोड़ी देर में चेन्नई से ओन्नकुलम के रास्ते होते हुए साथी मेरे द्वारा भेजे गए पते पर सतीश के घर आ पहुंचा। सतीश उसे लेने नीचे पहुंच गया।

सतीश का अंग्रेजी में भी थोड़ा हाथ तंग है। सतीश ने बताया की उसके लिए अंग्रेजी काला अक्षर भैंस बराबर है। ना आती है ना वो समझ पाता ना पढ़ सकता है।

बातों बातों में इसका यह उपाय निकला की वाह जो भी बोलता उसे गूगल संवाद की सहायता से उसकी बातों को मैं समझ लूंगा। उसी प्रकार वह मेरी अंग्रेजी इसी की सहायता से समझ लेगा।

कुछ वक्त विश्राम के बाद सतीश ने अपने परिवार से परिचित कराया। माताश्री ने स्वादिष्ट भोजन का प्रबंध किया है। भोजन के बाद सतीश ने कल की पूरी योजना बताई की यहाँ कहाँ कहाँ घूमना होगा और कहाँ कहाँ।

सोने के लिए अपने मित्रो का कमरा चुना। जहां उसके मित्र रात की ड्यूटी पर गए हुए हैं। जबतक वह सुबह आएंगे तब तक मैं घूमने निकल जाऊंगा।

बंगलुरु से अराक्कोनम 370किमी

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