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एशिया का सबसे स्वच्छ गाँव मावलेनोंग

डारंग में सुबह आज एशिया के सबसे साफ गांव जाने का विचार है जिसका नाम है मावलेनोंग। ये गांव लगातार एशिया के सबसे स्वच्छ गांव की श्रेणी में शुमार ही रहा है। सुबह के साढ़े छह बज रहे हैं। रात के अंधेरे में तो सिर्फ नदी का शोर ही सुनाई पड़ रहा था पर अभी उजाले में काफी कुछ देख सकता हूँ। तंबू के ऊपरी हिस्से में कीड़े चिपके हुए हैं। शायद रोशनी होने के कारण सब यहीं आ कर बस गए थे रात में। पर गनीमत है अन्दर एक भी नहीं हैं। कल शाम की सड़क दुर्घटना के बाद मरहम पट्टी करी थी। जिससे कुछ हद तक फायदा तो मिला है। दर्द भी कम है और खून भी जमा हुआ है। अजय तंबू के बाहर पहले से ही मौजूद है। तंबू के अंदर सिर्फ मैं और दोनों बैग। बाहर झांका तो सामने बेहती नदी से काफी दूरी और ऊंचाई पर हूँ। मोबाइल की रोशनी में इतना तो दिखा था कि एक पेड़ के नीचे मनरेगा के बोर्ड के सामने। पर अभी सब कुछ साफ़ …

भारत का आखिरी गांव माना

अब माना जायेंगे अब जब बद्री विशाल के दर्शन हो चुके हैं तो थोड़ी पेट पूजा हो जाए। इसी बात का ध्यान रखते हुए सबसे पहले तो बढ़ चला जहां चप्पल उठाने। उसके बाद ही पुल पार करके होटल की ओर प्रस्थान। चप्पल वाली जगह मंदिर के कपाट से थोड़ी दूरी पर है। दर्शन के लिए लगी कतार के समांतर चलते हुए पुल के दाहिनी तरफ आ गया। यहाँ कुछ पुजारी पहले की तरह अपनी टीकाकरण की दुकान खोले हुए हैं। मुझे भी बुलाने लगी। माथे की तरफ इशारा करते हुए आगे बढ़ गया। जब मैं हनुमान मंदिर से टिका लगवा कर आया हूँ तो तुमसे दोबारा क्यों लगवाऊंगा। किनारे ही रखी चप्पल पांव में डाली और चल पड़ा पुल की ओर। गजेन्द्र भाई इच्छा है उसी रेस्त्रां में भोजन करने की जिसे सुबह देख कर आए थे होटल के बगल में। बाकी लोग भी राजी हो गए। पुल पार करने के बाद दो चार दुकानें छोड़ कर हम आ पहुंचे इस दुकान में। पर यहाँ मजे भी भीड़ है। इतने बड़े रेस्त्रां में भी …

वागाह अटारी बार्डर पर दिखाया भारतीय सेना ने दम

वागाह-अटारी बार्डर ढाई बजे तक जीप निकल ली वागाह-अटारी बार्डर। पहले शहर के बाहर फिर हाईवे का रास्ता पकड़ते हुए खेत खलिहानों से गुजर कर बार्डर की ओर। अमृतसर सीमा खत्म होने के बाद गावों में कड़ी सुरक्षा देखने को मिली। चप्पे चप्पे पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। परिंदा भी पर नहीं मार सकता। जिनके पास खुद का वाहन है वो अपनी चार पहिया गाड़ी से निकल पड़े हैं। दुपहिया से जाता मुझे कौनों नजर ना आया। मौसम सुहाना बिल्कुल नहीं है, चुभन वाली गर्मी में घण्टेभर के लंबे सफ़र के बाद चार बजे तक वागाह बार्डर पर पहुंच गया। आगे बढ़ा तो मालूम पड़ा बैग बटुआ ले जाना प्रतिबंधित है। यहाँ मुझे ऑटो वाले और लॉकर वालों कि मिली भगत लगी। लॉकर रूम! सड़कों पर ऐसी कई दुकानें नजर आ रही हैं। मुझे जबरन बैग जमा करवाना पड़ा। बूढ़ी काकी का भी यही हाल है। जीप में सवारी भरने से पहले ही ड्राइवर ये सूचित कर देता तो छोटा बैग भी होटल में ही भागकर रख आता। ये जबरन वसूली है। बैग के …