विशाखापट्टनम में झलक भारतीय नौसेना की शक्ति की

आंध्रप्रदेश व तेलंगाना | भारत | विशाखापट्टनम

समय का सदुपयोग

अनुराग जी ने मुझे जगाने का बीड़ा उठाया। घड़ी में समय देखा तो सुबह के आठ बज रहे हैं।

कल वादे के मुताबिक अनुराग जी नौसेना कैंप ले जाने के लिए कल ही दो पास निकलवा लिए थे।

आज की योजना बताते हुए अनुराग ने बताया की हम इक्कठे बारह बजे तक निकलेंगे। अभी जरूरी काम से मामा मामी बाहर निकल जायेंगे।

टीवी पर भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका के क्रिकेट मैच का प्रसारण हो रहा है।

बल्लेबाज की तरफ इशारा करते हुए बोले ये मेरा पसंदीदा खिलाड़ी है। वो बल्लेबाज है रोहित शर्मा। जिससे ये मिलना भी चाहते हैं।

अंदर टीवी वाले कमरे में ही मैच का लुत्फ उठाते हुए नाश्ता करने लगे।

कुछ ही देर में मामा मामी कुछ जरूरी काम से अस्पताल निकल रवाना हो गए।

घर खाली है और मौका है झाउआ भर मैले कुचैले कपड़े धोने का। अब ना जाने कहाँ ये मौका मिले।

आखिरी बार कपड़े कोलकाता में धुले थे। तब से अब तक बस बैग कपड़ो से भर ही रहा हूँ।

एक एक कर सारे कपड़े बैग से निकाल कर दुसलखाने ले आया। करीब घंटा भर तो कपड़ा धोने में निकल गया।

कपड़े इतने ज्यादा धुल चुके हैं की इन्हे फैलाने की जगह काम पड़ गई है। बरामदे से ले कर आंगन तक।

मामा मामी भी अब घर आ चुके हैं अपना काम निपटा कर। उन्हों मेरी इस जटिल कार्य में मदद करी।

सारे के सारे कपड़े बरामदे में ही टांग दिए। स्नान ध्यान के बाद तैयार हो गया।

नौसेना कैंप रवाना

अनुराग जी के घर वापसी के बाद ग्यारह बजे तक हम निकल पड़े नौसेना कैंप की तरफ।

वहाँ अनुराग जी ने अपने मित्र को भी बुलाया है। चूंकि एक व्यक्ति दो लोगों को एक साथ मेहमान पास पर सैर नहीं करवा सकता।

नौसेना परिसर में नियुक्त कर्मचारी अपने मित्रगण या परिवार को घुमाने ला सकता है।

इस तरह से एक आदमी अनुराग जी के साथ और दूसरा उनके मित्र के साथ अन्दर दाखिल हो सकता है।

एक दुपहिया वाहन के साथ जुगाड से गाजूवाका से गुजरते हुए नौसेना कैंप पहुंच गए।

वाहन एक किनारे गली में लगा कर अनुराग जी के मित्र का इंतजार करने लगे।

मित्र अपने दुपहिया वाहन के साथ आ धमके। साथ ही प्रवेश पत्र ले कर भी आए हैं।

एक बार फिर से प्रवेश पत्र को अनुराग जी गौर से पढ़ने लगे। ताकि कोई हस्ताक्षर रह गया हो तो उसे समय रहते पूरा कर लिया जाए।

वरना एक बार जांच केंद्र में ऐसी कोई गलती पकड़ी गई तो अंदर दाखिल होने को मिलेगा ही नहीं फिर चाहें कितने प्रवेश पत्र बनवा लिया जाए।

प्रवेश पत्र को ठीक से देखने पर कुछ गड़बड़ी निकली। जिसको सही कराने के लिए अजय को वापस थमाया गया।

अजय जी भागे भागे वापस दफ्तर गए काग़ज़ बदलवाने। यहाँ धूप में खड़े हम तीन प्राणी उनका इंतजार कर रहे हैं।

अनुराग जी ने बताया की प्रमुख द्वार की रक्षा के लिए सेवानिवृत हो चुके सिपाहियों को ही मुस्तैद किया जाता है।

सुरक्षा कारणों के चलते।

काग़ज़ आया और इस बार सब ठीक पाया। वाहन में लद कर निकल पड़ा प्रवेश द्वार की ओर हांथ में प्रवेश पत्र लिए।

कड़ी सुरक्षा के बीच अति कड़ी जांच हो रही है जो देश के हित में है। वरना अहित करने वाले भी आसपास ही लगे रहते हैं।

समुद्री पोत पर लगे तिरंगे को सलामी देते ऐश्वर्या तिवारी

भारतीय नौसेना की शक्ति

अनुमति के साथ हम सभी अंदर दाखिल हुए।

यहाँ पर्यटकों के लिए जहाज से ले कर पनडुब्बी तक प्रदर्शनी में रखी गई है।

अनुराग जी ने विचार बनाया जहाज दिखाने का। गाड़ी पेड़ के नीचे लगा कर जहाज की ओर चल पड़ा। यहाँ एक दफा फिर जांच हुई।

किस्से कहानी सुनाते हुए अनुराग जी आगे बढ़ रहे हैं। अनुशासन के उदाहरण पेश करते हुए।

किसी कर्मचारी ने एक बार यहाँ बीच सड़क पर ही गाड़ी खड़ी कर निकल गया ना जाने कहाँ के लिए।

गश्त पर निकली जीप उस कर्मचारी को सबक सिखाने के लिए उसका वाहन जीप में बंधकर पूरे परिसर में नचाया।

उस दुपहिया वाहन के तो परखच्चे ही उड़ गए होंगे। ना दोबारा ऐसी जुर्रत की होगी अनुशासन तोड़ने की।

जहाज में संवेदनशील जगहों की तस्वीर लेना मना है। मेरे हिसाब से तो मोबाइल ही बंद करवा देना चाहिए सुरक्षा के लिहाज से।

भारतीय नौसेना जब महीनों दस्ते के लिएं निकलती है तो कैसे अपना जीवन पर्याय करती है ये देखने लायक है।

जहाज के द्वार पर शहादत को प्राप्त हुए थल सेना के वीरों की तस्वीरें लगी हैं। जिन्हे सलाम ठोकते हुए अधिकारी आगे बढ़ रहे हैं।

चार मंजिला इस जहाज में हर ओर गया। उधर दूसरी ओर बांग्लादेशी जहाज में तेल भरा जा रहा है।

डॉक के अंदर बने मीटिंग हॉल में आ गए। यहां के किस्सों को याद करते हुए अनुराग जी बताने लगे की सीओ साहब के अलावा उनकी उपस्थिति में कोई बैठता नहीं है कुर्सी पर।

एक बार ऐसी ही किसी लड़के को बैठा पाया तो उसे दिनभर खड़े रहने की सजा सुना दी गई।

बाहर की ओर जहाँ तिरंगा लहरा रहा है यहाँ काफी देर खड़ा रहा। सलाम किया और दूसरे विभाग की ओर अनुराग जी मुझे के आए।

जहाँ जलयात्रा के दौरान सैनिक समय बिताने के लिए क्या क्या करते है।

जीवन में एक बार जलयात्रा तो करनी ही है। फिर चाहे वो भारत। के किसी हिस्से से दूसरे हिस्से तक की हो या किसी अन्य देश के लिए। 

दूसरे छोर पर बड़ी टीन के नीचे बड़े बड़े जहाजों की धुलाई और मरम्मत का कार्य होता है।

जहाज में हर जगह बस पाइप लाइन बिछी है। कुछ समझ नही आ रहा कौन सी कहाँ से निकल रही है और कहाँ को जा रही है।

जंगी पोत

जहाज देखने के बाद बाहर निकल आया। अनुराग जी अब कहाँ ले जायेंगे ये तो यही बता सकते हैं।

वाहन तक पहुंचा, चालू हुआ और लद कर निकल पड़ा पीछे की ओर।

यहाँ पनडुब्बी की रंगाई पुताई चल रही है। जो कसर कल रह गई थी वो आज पनडुब्बी में जा कर पूरी कर सकता हूँ।

पर यहाँ का कार्य संभाले अधिकारी ने बताया की अभी कार्य जोरों पर है। इसलिए थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा।

तब तक के लिए दूसरे हिस्सों में चला जाऊं तो बेहतर है। हम निकल पड़े दूसरी तरफ।

पास में खड़े आईएनएस शक्ति में जाना प्रतिबंधित है। तस्वीर निकलना भी।

डॉक के अंदर बने मीटिंग हॉल में खड़े ऐश्वर्य तिवारी

पता चला की हम जंगी जहाज देखने आए हैं। भारतीय नौसेना के बड़े बड़े युद्धपोत देख कर मैं गदगद हुं।

दुश्मन के छक्के छुड़ा देने वाले जंगी जहाज जो सिर्फ हथगोलों और बड़ी बड़ी तोपो से लैस हैं एक बार उन्हें युद्ध में भी देखना तो बनता हैं।

अनुराग जी ने बताया कैसे भारतीय नौसेना हाल फिलहाल में चाइना जैसे बड़े देशों के साथ युद्ध अभ्यास करके लौटी है।

जब मैंने उनसे परमाणु जहाज के बारे में पूछा तब उन्होंने बताया कि परमाणु हथियारों से लैस जहाजों पर हर कोई नहीं जा सकता। 

सिर्फ चुनिंदा नौसेना के सैन्य प्रमुख ही और कर्मचारी। यहाँ तक कि उसकी सुरक्षा इतनी कड़ी है कि जहाज के इर्द गिर्द किसी प्रकार का कोई यंत्र भी नहीं काम करता।

कुछ प्रमुख आईएनएस के भीतर जाने का अवसर मिला। लेकिन मरम्मत के चलते आईएनएस शक्ति में प्रवेश निषेध रहा।

कुरसुर पनडुब्बी में मरम्मत और पुताई के काम के चलते यहाँ जाने से भी वंचित रह गया।

सुबह सबसे पहले इसे ही देखने आया था लेकिन विचार बदल गया और रुख भी।

लेकिन बड़े बड़े जंगी जहाज देख कर एक ही बात निकल रही है ये दिल मांगे मोर।

यहाँ बहुत से आईएनएस काफी सालों से बेड़े में शामिल हैं जबकि कुछ सेवानिवृत्त कर दिए जा चुके हैं।

कुछ जहाज अभी अभी समुद्र का चक्कर लगाकर लौटे हैं। कुछ जाने के लिए तैयार किए जा रहे हैं।

भारत ना केवल ज़मीनी स्तर पर बल्कि समुद्र पर भी दुश्मन के छक्के छुड़ा सकता है इस शक्ति को मैं खुद देख पा रहा हूँ।

जितना बड़ा जहाज उसकी साफ सफाई के लिए उतनी ही बड़ी व्यवस्था।

जंगी जहाज से ले कर आईएनएस पोत देखने के बाद भी एक बार फिर पनडुब्बी की ओर रुख किया। पर निराशा ही हांथ लगी।

कूदते चूहे

आखिरकार दो घंटा परिसर में बिताने के बाद अनुराग जी हमें बाहर ले आए। बाहर आते वक्त भी जांच केंद्र पर सख्ती से जांच हो रही है।

प्रवेश पत्र को दोबारा जांचा जा रहा है। यानी जिसका प्रवेश पत्र को जाए वो अंदर ही फंसा रह जाएगा!

बाहर निकलते ही गाड़ी की और सवारी की अदला बदली हुई। 

अनुराग जी के मित्र अजय अपने रास्ते निकल गए।

वैसे तो घूमने को काफी कुछ बचा है। पर बेहतर रहेगा घर निकला जाए।

पोत घूमना और इसमें मिली जानकारी बाकी जगहों पर जाने से कहीं बढ़कर है। मैं, साथी घुमक्कड़ और अनुराग जी तीनों प्राणी गजुवका निकल रहे हैं।

रास्ते भर कुछ ना कुछ बाते होती रहीं। अनुराग जी ने अपने कार्यशैली से ले कर कार्यकाल तक सब बताया।

समय भी हो गया है खाने पीने का और भूख भी जोरों की लगी है।

गाजूवाका के ही एक रेस्त्रां में हम निकल आए। अनुराग जी ने अपने लिए इडली और मैने और साथी घुमक्कड़ ने डोसा ऑर्डर किया।

पर्ची कटी भुगतान हुआ और मैं इंतजार में बाहर खड़ी में पर खड़ा हो गया।

अनुराग जी अपने गांव के बारे में बताने लगे। अजय, अनुराग और अजय के मामा अनुराग तीनो एक ही गांव संपर्क रखते हैं।

मैं तो सिर्फ श्रोता बनकर यह सारी राम कथा सुन रहा हुं। कहानी चल रही है पर मानो सेवक भोजन लाना ही भूल गए हों।

अनुराग जी के दोबारा टोकने पर एक एक कर सबकी थाली आती गईं।

सोच में डूबे अनुराग जी कुछ हैरान परेशान लग रहे हैं। खुद बाखुद ही समस्या की चर्चा करने लगे।

खैर अब ज्यादा घूमने के लिए बचा भी नहीं है विशाापट्टनम में। बेहतर यही होगा की विजयवाड़ा निकल जाऊं।

पर थकान इसकी इजाजत नहीं दे रही। दूसरा अनुराग जी के घर पर रुकना भी ठीक नहीं है।

अनुराग जी को अवगत करा दिया शाम तक निकलने का। ट्रेन ऐप पर विजयवाड़ा के लिए ट्रेनें भी उपलब्ध हैं। 

अगर रात को ट्रेन से निकल जाता हूँ तो सुबह तक तो पहुंच ही जाऊंगा।

इधर घुमक्कड़ी समुदाय से प्रवीण नमक किसी आदमी का आमंत्रण आया है।

वार्ता इतनी धीमी गति से हो रही है की कुछ कह पाना या निर्णय लेना संभव नहीं।

अनुराग जी ने बेहतरीन खातिरदारी की बिना अपनी समस्या की भनक लगे बगैर,शुक्रगुजार हूँ जांबाज़ सिपाही का

जाऊं तो जाऊं कहाँ

घर आ कर बैग उठाया। मामा मामी से अलविदा लिया और निकल पड़ा।

पर कहाँ ये नही पता। फिलहाल तो रेलवे स्टेशन। मुख्य सड़क तक अनुराग जी हमें छोड़ने आ गए।

ये सुनिश्चित करने की हम समय से निकल सकें। समय से बस भी मिल गई। टिकट कटाया प्रमुख बस अड्डे तक का।

उधर प्रवीण जी से भी धीमी वार्ता चालू है। वजनी बैग और थकान के चलते यही लग रहा की बस एक रात और रुक जाऊं तो शरीर के लिए बेहतर होगा।

बस अड्डे पर पहुंच कर भी कुछ निश्चित नहीं है की जाना कहाँ है। तभी प्रवीण जी ने अपना व्हाट्सएप नंबर प्रदान किया।

ये तो तय हो गया की विजयवाड़ा नहीं जाना है आज।

आज की रात उन्हीं घर बिताने का निर्णय लिया। चूंकि पिछले दो दिन की थकान भी है, और विजयवाड़ा के लिए कल सुबह निकलना उतना बुरा नहीं है।

जिसके बाद अब थोड़ी जान में जान आई। व्हाट्सएप के माध्यम से उसने वार्ता होने लगी और उन्होंने अपने घर का पता भेज दिया।

यहाँ से कुछ डेढ किमी दूर उनका घर ग्रीनपार्क के समीप दिखा रहा है।

पैदल ही निकल पड़ा उनके घर की ओर। रास्ते भर प्रवीण जी इस बात को दोहरा रहे हैं की मैं कहाँ तक पहुंच गया हूँ और कब तक पहुंच जाऊंगा।

खुशी का ठिकाना नही है। वजनी बैग भी हल्का लगने लगा है। कदम भी तेज कर लिए हैं।

गूगल नक्शे के मुताबिक चलता हुआ उनके घर के समीप पहुंच गया। तभी अचानक से फोन आता है।

ग्रीन पार्क

जिसमे एक सज्जन पूछते हैं क्या आप ये कपड़े पहने बैग लादे जा रहें हैं। मैं कुछ समझ पाता की प्रवीण जी ने ऊपर देखने को कहा।

काफी आगे निकल आने के बाद ऊपर देखा तो नजर पड़ी एक पीली टी शर्ट पहने एक आदमी पर जो हांथ हिलाते हुआ घर में दाखिल होने को के रहा है।

खुद ही नीचे मुझे लेने आ गए। हांथ मिलाया और घर की लिफ्ट से ऊपर जाने लगा।

तीसरी मंजिल पर बने कमरे में जाने के लिए दूसरी मंजिल तक लिफ्ट से आया।

बाकी का सफर सीढी चढ़ते हुए ऊपर निकल आया।

यहाँ प्रवीण जी ने मुझे मेरा कमरा दिखाया और रुकने को बोला।

इच्छा पूछते हुए मैने जवाब दिया की सर बस पानी चाहिए इसके सिवाय कुछ नहीं।

वो वापस चल दिए और कुछ देर में एक पानी से भरा जग रख गए।

अपने बारे में परिचय देते हुए बताया की वो कल सुबह अपने परिवार के साथ निकल जायेंगे समुद्री तट पर घूमने।

उसी हिसाब से मैं भी आगे पीछे निकल जाऊंगा।

कमरा काफी बड़ा है। जैसे भगवान ने एक थके मांदे प्राणी की पुकार सुन ली। और आज यहाँ ठहरने को मिल रहा है।

ग्रीन पार्क में ये आलीशान अपार्टमेंट है जहाँ से समुद्र देखा जा सकता है।

खैर मुझे लगा सुबह शायद निकालने से पहले कुछ बातें होंगी। सुबह की सुबह देखी जाएगी। उफान मारती हुई समुद्र की लहरे मन में भी उफान मारने लगीं।

कई अवसर ऐसे जरूर आते होंगे जब एक दम एकांत में समुद्र की लहरों की आवाज़ यहाँ तक आती होगी।

कितना मनमोहक दृश्य होता होगा। मैं कल्पना कर सकता हुं। चित्र के माध्यम से शायद आप भी कर सकें?

बैग से सामान बिखेरा और गीले कपड़े जो एक दो ही हैं फैला दिए। सुबह साथी घुमक्कड़ अपने कपड़े धोने से वंचित रह गया था।

सो वो अब झाऊआ भर कपड़े ले कर दुसलखाने में निकल गया है।

गजुवाका से नौसेना कैंप से शीला नगर से द्वारका नगर तक कुल यात्रा 65km

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *