टेंट में हुई सिलसिलेवार चोरी
बिहार | बोधगया | भारत

टेंट में हुई सिलसिलेवार चोरी

हाहाकार चारों तरफ अफरा तफरी का माहौल है। सुबह उठकर यह कैसा दृश्य देखने को मिल रहा है। रात भर में किसी शातिर चोर ने अपना काम कर दिया था। तकरीबन आठ से दस मोबाइल लोगों की जेब से निकल चुके थे। सोते हुए उन्हें इस बात की खबर ही नहीं पड़ी। इस अफरा तफरी…

बोधगया जहाँ हुई भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति
धार्मिक स्थल | बिहार | बोधगया | भारत

बोधगया जहाँ हुई भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति

बोधगया को रवाना बस में मनोरंजन की पूर्ण व्यवस्था है। टीवी, एसी जैसी हर सुविधा मुहैया है। गाड़ी चल पड़ी और मैं सबसे पीछे विराजमान हो गया। पीछे की काफी सीटें खाली हैं। कंडक्टर आगे से चल कर आते हुए सबका टिकट काटते हुए मेरी तरफ ही आ रहा है। बस में लगा टीवी चालू…

विश्व शांति स्तूप राजगीर
बिहार | भारत | राजगीर

विश्व शांति स्तूप राजगीर

मखमली सुबह सबसे पहले मैं ही उठा। साथी घुमक्कड तो घोड़े बेंच कर सो रहा है। मेरी कल्पना से परे राजगीर एक छोटा सा कस्बा है। सुबह का नज़ारा ही अलग है। सड़क पर स्कूली बच्चे कुछ दौड़ते भागते, तो कुछ रिक्शे में सवार, कुछ अपने स्कूल नन्हे क़दमों से अपनी मंज़िल की ओर बढ़…

विश्व धरोहर नालंदा विश्वविद्यालय
नालंदा | बिहार | भारत

विश्व धरोहर नालंदा विश्वविद्यालय

पटना से नालंदा नालंदा विश्वविद्यालय केवल एक विश्वविद्यालय नहीं बल्कि एक सदियों पुरानी संस्कृति थी जिसे दुष्टता के चलते मिटा दिया गया। आज पटना से उसी विश्व विख्यात विश्वविद्यलय रवाना होने के लिए सुबह से तैयारी में जुटा हूँ। स्नान पाठ करके सुमित के साथ नाश्ता करने के लिए आगे कमरे में आ गया। कल…

पटना संग्रहालय में हुआ इतिहास से रूबरू
पटना | बिहार | भारत

पटना संग्रहालय में हुआ इतिहास से रूबरू

गाँधी मैदान आज भ्रमण का दूसरा दिन है। उठने में थोड़ी देरी हुई जिसका कारण रहा कल रात तक हुई बातें। स्नान और नाश्ते के बाद भी कोई विचार विमर्श नहीं हुआ की घूमने कहाँ जायेंगे। पटना में घूमने लायक जगहें भी कम नहीं हैं। गोलघर,ऐतिहासिक गांधी मैदान, पटना संग्रहालय, पटना साहिब, बुद्धा स्मृति पार्क।…

शांति का प्रतीक अशोक स्तम्भ
बिहार | भारत | वैशाली

शांति का प्रतीक अशोक स्तम्भ

कानपुर से पटना आज 20 सितंबर है। हर कीमत पर पटना के लिए रवाना होना है। पिछले एक सप्ताह में दो ट्रेन रद्द करने के बाद ऐसा ही लगा। आलस की चादर सिर चड़कर बोल रही थी। नतीजन शरीर आराम की अवस्था की ओर ढकिलता चला गया। पूर्णतः 50 दिन के विश्राम के  पश्चात् घर…