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कल्पा का सुसाइड पॉइंट जहाँ लोग जाते है मौत को गले लगाने!

बदली योजना सुबह जल्दी उठने कि बजाए आंख बहुत देर से खुली। जैसा रात में हाँथ में बैग फसा कर सोया था सुबह खुद को वैसा ही पाया। बेंच पर नींद भी सही आ गई। उसके ऊपर स्लीपिंग बैग गद्दे का कम कर गया। रात में कमरे का दरवाजा उड़का लिया था ताकि कोई अन्दर ना आ पाए। कमरे में तीन बेंच पड़ी सो तीन आदमी। नींद खुलने पर देखा कि सामने वाली एक बेंच खाली पड़ी है। बस अड्डे पर हलचल भी हल्की फुल्की दिख रही है। यात्रियों का आना जाना बरकरार है। कुछ अपना झोला झंडा लेे कर बाहर ही बैठे हैं। कमरे में वो ही आ रहे हैं जिनको अपना फोन चार्ज करना है। मोबाइल तो मेरा भी चार्ज नहीं है। सारे मोबाइल और पावर बैंक चार्जिंग पर लगा कर मैं और अजय बारी बारी से तैयार होने लगे। बस अड्डे पर ही बने दुसलखाने में। जब तक मैं तैयार हुआ तब तक बस अड्डे की भीड़ भी कम हो गई। योजना यही है कि काजा के लिए निकला जाए फिर पूरा …

अनोखी 360° सिरोलसर झील

निकलने की तैयारी रात को भले ही देरी से सोया लेकिन जल्दी उठने में कोई कसर नहीं छोड़ी। बस पकड़ने के लिए मैं समय पर उठ गया। मोबाइल में समय देखा तो अभी चार बज रहे हैं। हिमाचल में एक दफा बस छूटी तो समझो पूरा दिन बर्बाद। ये तीन चार घंटे की नींद ले कर खुद को तसल्ली दी। उठ जा ऐश्वर्य, हम बस में सो लेंगे। मन ने बात भी बड़ी जल्दी मान ली। मैट पर से उठ ही रहा हूँ कि तभी अलार्म बज उठा। अलार्म बजने से पहले उठना आज की पीढ़ी के लिए किसी उपलब्धि से कम नहीं। अलार्म बजा तो लगा मानो बम फटा हो। नींद ना खुली हो होश आया हो। बस छूटने और दिन की बर्बादी से बचने के लिए नींद भंग करना बहुत जरूरी है। इस विचार मात्र से पूरे शरीर में बिजली दौड़ गई हो। फटाफट बोरिया बिस्तर समेट कर बैग में डाला। रातभर ऊनी मोजे टोपा सब बाहरी ही पड़ा रहा। मैट, चादर सब लपेट कर बैग में एडजस्ट कर दिया। बैग टांगा और …

शिवखोड़ी की रेहस्मई गुफाएं

जाने की तैयारी कल रात जितनी देरी से सोया आज सुबह उतना विलंब उठने में भी हुआ। छोटे से कमरे में सारे इलेक्ट्रॉनिक आइटम भी रात भर में चार्ज हो गए। बंद पड़े कूलर के ऊपर से दाईं तरफ के प्लग में अपना खुद का सॉकेट फिट किया था। जिसमे दो ट्रांसफार्मर(पावर बैंक), दो मोबाइल एक GoPro, एक चार सेट वाला सेल चार्जर खुसा है। आज हर हाल में शिवखोड़ी की रेहस्मई गुफाएं देखने जाना है। जितना सॉकेट के ऊपर लोड है उतना तो आम आदमी रोजमर्रा की ज़िन्दगी में चलते फिरते उठा लेता है। आंख खुली बिस्तर पर आसपास हाथ पटका लेकिन मोबाइल ना मिला कहीं। मिलेगा भी कैसे मोबाइल तो दो गज की दूरी पर बंद कूलर के ऊपर रखा है। अंगडाते- जम्हाई लेते हुए बिस्तर से नीचे उतरा। आंख मसलते हुए कूलर पर रखे मोबाइल में समय देखा तो नौ बज रहे हैं। सिर्फ दो घंटे में पहुंचना है बस अड्डे। आज भारत की राजनीति के लिए बड़ा दिन है। हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव के नतीजे शाम तक घोषित होने …

स्वर्ग में बसा धर्मशाला क्रिकेट स्टेडियम

जम्मू निकलने की तैयारी जम्मू पहुंचने के लिए सुबह जल्दी उठना और उठने के बाद समय से निकल जाना एक चुनौती है। चिड़ियों की चहचहाहट कान में पड़ने से मैं छह बजे तक सो कर उठा। सर्द हवाओं के बीच टेंट के बाहिर निकला। मौसम बहुत ही सुहावना और ठंडा है। रात में अंधेरे के कारण आस पास और दूर की चीज़ों का अंदाज़ा भी नहीं लग पा रहा था वहीं अब दूर दूर तक देखा जा सकता है। अगर समय रहा तो धर्मशाला क्रिकेट स्टेडियम जरूर जाऊंगा। जैसे ध्यान दिया कि एक लारी वाला एक पहाड़ी से दूसरी पहाड़ी पर दूध की सप्लाई कर रहा है। ये सब इतनी दूर घटित हो रहा है जिसे देखने के लिए एकाग्रचित होना पड़ेगा। मैंने ये नज़ारा अजय को भी दिखाने की कोशिश की पहले तो वो पहाड़ी ही ढूंढता रह गया, बड़ी देर बाद उसे लारी नजर आईं। रात में अंधकार में जो छोटी सी जगह मालूम पड़ रही थी वही चारों ओर पहाड़ियों से ऐसे घिरी है जैसे भारतीय सिनेमा में पुलिस डाकू को चारो …